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Lyrics
दीवाना मुझ सा नहीं इस अम्बर के नीचे -२ आगे है क़ातिल मेरा और मैं पीछे-पीछे दीवाना मुझ सा ...
पाया है दुश्मन को जब से प्यार के क़ाबिल तब से ये आलम है रस्ता याद न मंज़िल नींद में जैसे चलता है कोई चलना यूँ ही आँखें मींचे दीवाना मुझ सा ...
हमने भी रख दी हैं कल पे कल की बातें -२ जीवन का हासिल हैं पल दो पल की बातें दो ही घड़ी का साथ रहेगा करना क्या है तनहा जी के दीवाना मुझ सा ...