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· 1966
Lyrics
छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा के जैसे मंदिर में लौ दिये की
तुम अपने चरणों में रख लो मुझको तुम्हारे चरणों का फूल हूँ मैं मैं सर झुकाए खड़ी हूँ प्रियतम - के जैसे मंदिर में लौ दिये की
ये सच है जीना था पाप तुम बिन ये पाप मैने किया है अब तक मगर है मन में छवि तुम्हारी - के जैसे मंदिर में लौ दिये की
फिर आग बिरहा की मत लगाना के जलके मैं राख हो चुकी हूँ ये राख माथे पे मैने रख ली - के जैसे मंदिर में लौ दिये की