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· 1961
Lyrics
जा रे, जा रे उड़ जा रे पंछी बहारों के देस जा रे यहाँ क्या है मेरे प्यारे क्यूँ उजड़ गई बगिया मेरे मन की जा रे ...
ना डाली रही ना कली अजब ग़म की आँधी चली उड़ी दुख की धूल राहों में जा रे ...
मैं वीणा उठा ना सकी तेरे संग गा ना सकी ढले मेरे गीत आहों में जा रे ...