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Ajeeb Dastan Hai Yeh

· 1960

Lyrics

अजीब दास्ताँ है ये कहाँ शुरू कहाँ ख़त्म ये मंज़िलें हैं कौन सी न वो समझ सके न हम अजीब दास्ताँ है ये कहाँ शुरू कहाँ ख़त्म