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Kai Baar Yun Bhi Dekha Hai

· 1974

Lyrics

कई बार यूं ही देखा है ये जो मन की सीमा रेखा है मन तोड़ने लगता है अन्जानी प्यास के पीछे अन्जानी आस के पीछे मन दौड़ने लगता है

राहों में, राहों में, जीवन की राहों में जो खिले हैं फूल फूल मुस्कुराके कौन सा फूल चुराके, रख लूं मन में सजाके कई बार यूं ही देखा है ...

जानूँ न, जानूँ न, उलझन ये जानूँ न सुलझाऊं कैसे कुछ समझ न पऊँ किसको मीत बनाऊँ, किसकी प्रीत भुलाऊँ कई बार यूं ही देखा है ...