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Kaun Aaya Ke Nigahon Mein Chamak Jaag Uthi

· 1965

Lyrics

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी -२ कौन आया

किसके आने की ख़बर ले के हवाएँ आईं -२ जिस्म के फूल चटकने की सदाएँ आईं -२ ओ ओ ओ आ ( रूह खिलने लगी ) -२ साँसों में महक जाग उठी दिल के सोए हुए ...

किसने ये मेरी तरफ़ देख के बाँहें खोलीं -२ शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं -२ ओ ओ ओ आ ( होंठ तपने लगे ) -२ ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी दिल के सोए हुए ...

किसके हाथों ने मेरे हाथों से कुछ माँगा है -२ किसके ख़्वाबों ने मेरी रातों से कुछ माँगा है -२ ओ ओ ओ आ ( साज़ बजने लगे ) -२ आँचल में खनक जाग उठी दिल के सोए हुए ...