91 / 328

Yeh Raat Bheegi Bheegi

· 1956

Lyrics

म : ये रात भीगी-भीगी ये मस्त फ़िज़ाएँ उठा धीरे-धीरे वो चाँद प्यारा-प्यारा : क्यों आग सी लगा के गुमसुम है चाँदनी सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा

म : इठलाती हवा नीलम सा गगन कलियों पे ये बेहोशी की नमी ऐसे में भी क्यों बेचैन है दिल जीवन में न जाने क्या है कमी : क्यों आग सी लगा के ... म : ये रात भीगी-भीगी ...

: जो दिन के उजाले में न मिला दिल ढूँढे ऐसे सपने को इस रात की जगमग में डूबी मैं ढूँढ रही हूँ अपने को म : ये रात भीगी-भीगी ... : क्यों आग सी लगा के ...

म : ऐसे में कहीं क्या कोई नहीं भूले से जो हमको याद करे : इक हल्की सी मुस्कान से जो सपनों का जहाँ आबाद करे म : ये रात भीगी-भीगी ...