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· 1975
Lyrics
दिल क्या करे जब किसी से किसी को प्यार हो जाए जाने कहाँ कब किसी को किसी से प्यार हो जाए ऊँची-ऊँची दीवारों सी इस दुनिया की रस्में न कुछ तेरे बस में जुलिए, न कुछ मेरे बस में
(जैसे पर्वत पे घटा झुकती है जैसे सागर से लहर उठती है ऐसे किसी चहरे पे निगाह रुकती है) हो, रोक नहीं सकती नज़रों को, दुनिया भर की रस्में न कुछ तेरे बस में जुलिए, न कुछ मेरे बस में दिल क्या करे ...
आ मैं तेरी याद में सब को भुला दूँ दुनिया को तेरी तसवीर बना दूँ मेरा बस चले तो दिल चीर के दिखा दूँ हो, दौड़ रहा है साथ लहू के प्यार तेरे नस्-नस में न कुछ तेरे बस में जुलिए, न कुछ मेरे बस में दिल क्या करे ...