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Woh Subah Kabhi To Aayegi

· 1958

Lyrics

##Pअर्त १##

वो सुबह कभी तो आएगी, वो सुबह कभी तो आएगी इन काली सदियों के सर से, जब रात का आँचल ढलकेगा जब दुख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का साग़र छलकेगा जब अम्बर झूम के नाचेगा, जब धरती नग़मे गाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

जिस सुबह की ख़्हातिर जुग्-जुग से हम सब मर्-मर्कर जीते हैं जिस सुबह के अमृत की धुन में, हम ज़हर के प्याले पीते हैं इन भूखी प्यासी रूहों पर एक दिन तो करम फ़रमाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

माना कि अभी तेरे मेरे अरमानों की क़ीमत कुछ भी नहीं मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर इनसानों की क़ीमत कुछ भी नहीं इनसानों की इज़्ज़त जब झूठे सिक्कों में न तोली जाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

##Pअर्त २##

दौलत के लिये जब औरत की इस्मत को न बेचा जाएगा चाहत को न कुचला जाएगा, ग़ैरत को न बेचा जाएगा अपने काले करतूतों पर जब ये दुनिया शरमाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

बीतेंगे कभी तो दिन आख़्हिर ये भूख के और बेकारी के टूटेंगे कभी तो बुत आख़्हिर दौलत की इजारागारी के जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

मजबूर बुढ़ापा जब सूनी राहों की धूल न फाँकेगा मासूम लड़कपन जब गन्दी गलियों में भीख न माँगेगा हक़ माँगने वालों को जिस दिन सूली न दिखाई जाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

फ़ाक़ों की चिताओं पर जिस दिन इनसाँ न जलाए जाएँगे सीनों के दहकते दोज़ख़्ह में अरमाँ न जलाए जाएँगे ये नरक से भी गन्दी दुनिया जब स्वर्ग बनाई जाएगी वो सुबह कभी तो आएगी ॥।

##Pअर्त ३##

जब धरती करवट बदलेगी, जब क़ैद से क़ैदी छुटेंगे जब पाप घरौंदे फूटेंगे, जब ज़ुल्म के बँधन टूटेंगे जेलों के बिना जब दुनिया की सरकार चलाई जाएगी उस सुबह को हम ही लाएँगे, वो सुबह हमीं से आएगी वो सुबह हमीं से आएगी, वो सुबह हमीं से आएगी

## ठे फ़ोल्लोविन्ग त्वो वेर्सेस मय नोत हवे बीन रेचोर्देद फ़ोर थे मोविए। ## ## ठेय अप्पेअर इन थे ओरिगिनल नज़्म्, इन्च्लुदेद इन षहिर्'स ख़ुल्लियात्। ##

मनहूस समाजी ढाँचों में जब ज़ुल्म न पाले जाएँगे जब हाथ न काटे जाएँगे जब सर न उछाले जाएँगे जेलों के बिना जब दुनिया की सरकार चलाई जाएगी वो सुबह हमीं से आएगी

संसार के सारे मेहनत्कश खेतों से मिलों से निकलेंगे बेघर्, बेदर्, बेबस इन्साँ तारीक बिलों से निकलेंगे दुनिया अम्न और ख़्हुश्हाली के फूलों से सजाई जाएगी वो सुबह हमीं से आएगी