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· 1965
Lyrics
पुकारता चला हूँ मैं गली गली बहार की बस एक छाँव ज़ुल्फ़ की बस इक निगाह प्यार की पुकारता चला हूँ मैं
ये दिल्लगी ये शोखियाँ सलाम की यहीं तो बात हो रही है काम की कोई तो मुड़ के देख लेगा इस तरफ़ कोई नज़र तो होगी मेरे नाम की पुकारता चला हूँ मैं
सुनी मेरी सदा तो किस यक़ीन से घटा उतर के आ गयी ज़मीन पे रही यही लगन तो ऐ दिल्-ए-जवाँ असर भी हो रहेगा इक हसीन पे पुकारता चला हूँ मैं