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Kahin Pe Nigahen Kahin Pe Nishana

· 1956

Lyrics

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना -२ जीने दो ज़ालिम बनाओ न दीवाना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना -२

कोई न जाने इरादे हैं किधर के -२ मार न देना तीर नज़र का किसी के जिगर पे -२ नाज़ुक ये दिल है बचाना ओ बचाना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना -२

तौबा जी तौबा निगाहों का मचलना -२ देख्-भाल के ऐ दिलवालों पहलू बदलना -२ क़ाफ़िर अदा की अदा है मस्ताना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना -२

ज़ख़्मी हैं तेरे जायें तो कहाँ जायें -२ तेरे तीर के मारे हुये देते हैं सदायें -२ कर दो जी घायल तुम्हारा है ज़माना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना -२

आया शिकारी ओ पन्छी तू सम्भल जा -२ देख जाल है ज़ुल्फ़ों का तू चुपके से निकल जा -२ उड़ जा ओ पन्छी शिकारी है दीवाना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना -२