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Madhumati · 1958
Lyrics
आजा रे परदेसी मैं तो कब से खड़ी इस पार मेरी पतली कमर ये अकेली डगर आजा रे परदेसी
नैना भए बरसात साजन कब आओगे आजा रे परदेसी मैं तो कब से खड़ी इस पार