64 / 328

Sun mere bandhu re

· 1959

Lyrics

सुन मेरे बंधू रे, सुन मेरे मितवा सुन मेरे साथी रे

होता तू पीपल मैं होती अमर लता तेरी -२ तेरे गले माला बनके, पड़ी मुसकाती रे सुन मेरे साथी रे सुन मेरे बंधू रे ॥।

जिया कहे तू सागर मैं होती तेरी नदिया -२ लहर बहर करती अपने, पीया से मिल जाती रे सुन मेरे साथी रे सुन मेरे बंधू रे ॥।