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· 1959
Lyrics
सुन मेरे बंधू रे, सुन मेरे मितवा सुन मेरे साथी रे
होता तू पीपल मैं होती अमर लता तेरी -२ तेरे गले माला बनके, पड़ी मुसकाती रे सुन मेरे साथी रे सुन मेरे बंधू रे ॥।
जिया कहे तू सागर मैं होती तेरी नदिया -२ लहर बहर करती अपने, पीया से मिल जाती रे सुन मेरे साथी रे सुन मेरे बंधू रे ॥।