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Chingari Koi Bhadke

· 1972

Lyrics

आनंद बाबू : रो मत पुश्पा, आज तुम जो हो जिस जगह हो, तुम्हारे आँख के पानी ## सलिने वतेर्, ई मेअन ## नमकीन पानी के अलावा कुछ नहीं है। इसलिये इन्हें पोंछ डालो पुश्पा, ## ई हते तेअर्स्।## पुश्पा : हाँ आनंद बाबू आप ठीक कहते हैं। बैठिये। आनंद बाबू : छोड़ो पुश्पा, चलो आज कहीं बाहर चलते हैं। ढूँढें कोई ऐसी जगह जहाँ थोड़ी देर के लिये ही सही कुछ याद न आये, न तुम्हें न मुझे।

चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये सावन जो अगन लगाये, उसे कौन बुझाये, ओ ... उसे कौन बुझाये

पतझड़ जो बाग उजाड़े, वो बाग बहार खिलाये जो बाग बहार में उजड़े, उसे कौन खिलाये ओ ... उसे कौन खिलाये

हमसे मत पूछो कैसे, मंदिर टूटा सपनों का - (२) लोगों की बात नहीं है, ये किस्सा है अपनों का कोई दुश्मन ठेस लगाये, तो मीत जिया बहलाये मन मीत जो घाव लगाये, उसे कौन मिटाये

न जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते - (२) पीते हैं तो ज़िन्दा हैं, न पीते तो मर जाते दुनिया जो प्यासा रखे, तो मदिरा प्यास बुझाये मदिरा जो प्यास लगाये, उसे कौन बुझाये ओ ... उसे कौन बुझाये

माना तूफ़ाँ के आगे, नहीं चलता ज़ोर किसीका - (२) मौजों का दोष नहीं है, ये दोष है और किसी का मजधार में नैया डोले, तो माझी पार लगाये माझी जो नाव डुबोये, उसे कौन बचाये ओ ... उसे कौन बचाये

चिंगारी ...