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· 1960
Lyrics
चल री सजनी अब क्या सोचे - (२) कजरा ना बह जाये रोते रोते चल री सजनी अब क्या सोचे
(बाबुल पछताए हाथों को मल के काहे दिया परदेस टुकड़े को दिल के) आँसू लिये, सोच रहा, दूर खड़ा रे चल री सजनी ...
ममता का आँगन्, गुड़ियों का कंगना छोटी बड़ी सखियाँ, घर गली अंगना छूट गया, छूट गया, छूट गया रे चल री सजनी ...
(दुल्हन बनके गोरी खड़ी है कोई नही अपना कैसी घड़ी है ) - (२) कोई यहाँ, कोई वहाँ, कोई कहाँ रे
चल री सजनी अब क्या सोचे कजरा ना बह जाये रोते रोते चल री सजनी अब क्या सोचे