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kabhi to milegi kahi to milegi

· 1962

Lyrics

कभी तो मिलेगी, कहीं तो मिलेगी बहारों की मंज़िल राही बहारों की मंज़िल राही ...

लम्बी सही दर्द की राहें दिल की लगन से काम ले आँखों के इस तूफ़ाँ को पी जा आहों के बादल थाम ले दूर तो है पर्, दूर नहीं है नज़ारों की मंज़िल राहि बहारों की मंज़िल राही ...

आ हा हा हा, ल ला, ला ल ल, अह हा हा ह ह

माना कि है गहरा अन्धेरा गुम है डगर की चाँदनी मैली न हो धुँधली पड़े न देख नज़र की चाँदनी डाले हुए है, रात की चादर सितारों की मंज़िल राही बहारों की मंज़िल राही ...

होने को है सुख का उजाला अश्कों के तारे ढल गये हर सू तेरे नक़्श्-ए-क़दम के फूलों के दीपक जल गये देख तो मुड़ के, साथ है तेरे सहारों की मंज़िल्, राही ...