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· 1961
Lyrics
मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुँएं में उड़ाता चला गया
बरबादियों का सोग़ मनाना फ़िज़ूल था - बरबादियों का जश्न मनाता चला गया मैं ज़िंदगी ...
जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया - जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया मैं ज़िंदगी ...
ग़म और खुशी में फ़र्क न महसूस हो जहाँ - मैं दिल को उस मुक़ाम पे लाता चला गया मैं ज़िंदगी ...