242 / 328

· 1968
Lyrics
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में फूल नहीं मेरा दिल है प्रीयतम मेरे तुम भी लिखना क्या ये तुम्हारे क़ाबिल है प्यार छिपा है ख़त में इतना जितने सागर में मोती चूम ही लेता हाथ तुम्हारा पास जो मेरे तुम होती फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...
नींद तुम्हें तो आती होगी क्या देखा तुमने सपना आँख खुली तो तन्हाई थी सपना हो न सका अपना तन्हाई हम दूर करेंगे ले आओ तुम शेहनाई प्रीत लगा के भूल न जाना प्रीत तुम्हीं ने सिखलाई फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...
ख़त से जी भरता ही नहीं अब नैन मिले तो चैन मिले चाँद हमारी अंगना उतरे कोई तो ऐसी रैन मिले मिलना हो तो कैसे मिले हम मिलने की सूरत लिख दो नैन बिछाये बैठे हैं हम कब आओगे ख़त लिख दो फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...