154 / 328
Mughal-e-Azam · 1960
Lyrics
मोहे पनघट पे नन्दलाल छेड़ गयो रे मोरी नाजुक कलइया मरोड़ गयो रे मोहे पनघट पे ...
कंकरी मोहे मारी, गगरिया फोड़ दारी मोरी साड़ी अनाड़ी भिगोय गयो रे मोहे पनघट पे ...
नैनों से जादू किया, जियरा मोह लिया मोरा घूँघटा नजरियो से तोड़ गयो रे मोहे पनघट पे ...