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Lyrics
कोई हमदम ना रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा कोई हमदम ना रहा ...
शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे -२ जो मुझे राह दिखाए वही तारा न रहा कोई हमदम ना रहा ...
ऐ नज़ारों ना हँसो मिल ना सकूँगा तुमसे -२ तुम मेरे हो ना सके मैं तुम्हारा ना रहा कोई हमदम ना रहा ...
क्या बताऊँ मैं कहाँ यूँ ही चला जाता हूँ -२ जो मुझे फिर से बुलाए वो इशारा ना रहा कोई हमदम ना रहा ...