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· 1968
Lyrics
मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद का टुकड़ा रहता है अफ़सोस ये है के वो हमसे कुछ उखड़ा उखड़ा रहता है
जिस रोज़ से देखा है उसको हम शमा जलाना भूल गए दिल थाम के ऐसे बैठे हैं कहीं आना जाना भूल गए अब आठ पहर इन आँखों में वो चंचल मुखड़ा रहता है
बरसात भी आकर चली गई बादल भी गरज कर बरस गए पर उसकी एक झलक को हम ऐ हुस्न के मालिक तरस गए कब प्यास बुझेगी आँखों की दिन रात ये दुखड़ा रहता है