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Lyrics
मैं चली मैं चली, देखो प्यार की गली कोई रोके न मुझे, मैं चली मैं चली न न ना मेरी जां, देखो जाना न वहाँ कोई प्यार का लुटेरा, लूटे न मेरी जां मैं चली मैं चली ...
ये फ़िज़ा ये हवा, ये नज़ारे ये समा अब प्यार न हुआ तो फिर कब होगा कोई खेल तो नहीं, ये है प्यार मेरी जां तुझे पता भी न चलेगा ये जब होगा मैं चली मैं चली ...
कहीं आँख न मिले, कहीं दिल न लगे तो प्यार का ज़माना किस काम आया ? तो ये रुत ये घटा बोलो सोचेगी क्या मैं चली मैं चली ...