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· 1968
Lyrics
##ंउकेश वेर्सिओन्##
चंदन-सा बदन चंचल चितवन धीरे से तेरा ये मुसकाना मुझे दोष न देना जग्वालो - हो जाऊँ अगर मैं दीवाना चंदन-सा बदन ॥।
ये काम कमान भँवें तेरी पलकों के किनारे कजरारे माथे पर सिंदूरी सूरज होंठों पे दहकते अंगारे साया भी जो तेरा पड़ जाए - आबाद हो दिल का वीराना चंदन-सा बदन ॥।
तन भी सुंदर मन भी सुंदर तू सुंदरता की मूरत है किसी और को शायद कम होगी मुझे तेरी बहुत ज़रूरत है पहले भी बहुत मैं तरसा हूँ - तू और न मुझको तरसाना चंदन-सा बदन ॥।
---- ##ळत वेर्सिओन्##
चंदन-सा बदन चंचल चितवन धीरे से तेरा ये मुसकाना मुझे दोष न देना जग्वालो - हो जाए अगर दिल दीवाना चंदन-सा बदन ॥।
ये विशाल नयन जैसे नील गगन पंछी की तरह खो जाऊँ मैं सरहाना जो हो तेरी बाँहों का अंगारों पे सो जाऊँ मैं मेरा बैरागी मन डोल गया - देखी जो अदा तेरी मस्ताना चंदन-सा बदन ॥।
तन भी सुंदर मन भी सुंदर तू सुंदरता की मूरत है किसी और को शायद कम होगी मुझे तेरी बहुत ज़रूरत है पहले भी बहुत दिल तरसा है - तू और न दिल को तरसाना चंदन-सा बदन ॥।